Poster War In Gurugram : गुरुग्राम बारिश कांड – युवा कांग्रेस का अनोखा विरोध प्रदर्शन, पूछा – “शहर को डुबोने वाला कौन?”
यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है, और कई नागरिकों ने युवा कांग्रेस के इस कदम का समर्थन करते हुए अपनी आवाज़ बुलंद की है। गुरुग्राम की ये समस्याएं अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं

Poster War In Gurugram : हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने गुरुग्राम में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, जिससे स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खुल गई है। भारी जलभराव, घंटों तक लगे ट्रैफिक जाम और बिजली के करंट से हुई दुर्भाग्यपूर्ण मौतों ने एक बार फिर शहरी प्रशासन की लचर तैयारियों और कमजोर बुनियादी ढांचे को उजागर कर दिया है। इसी गंभीर स्थिति के खिलाफ गुरुग्राम युवा कांग्रेस ने एक अनोखे और प्रभावशाली तरीके से विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया है।
“गुरुग्राम की इस बदहाली का जिम्मेदार कौन?”

गुरुग्राम युवा कांग्रेस ने शहर भर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर सीधे सरकार से सवाल किए हैं, जो हर नागरिक के मन में उठ रहे हैं — “गुरुग्राम की इस बदहाली का जिम्मेदार कौन?” और “ज़रा सी बारिश में गुरुग्राम को डुबाने वाला कौन?” इस सांकेतिक प्रदर्शन के माध्यम से युवा कांग्रेस ने भाजपा की ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार को कटघरे में खड़ा किया और आम जनता की पीड़ा को मुखर आवाज़ दी।


‘स्मार्ट सिटी’ नहीं, भाजपा सरकार की ‘स्मार्ट नाकामी’: अभिषेक यादव
गुरुग्राम युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अभिषेक यादव ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “गुरुग्राम जैसे आधुनिक शहर में अगर थोड़ी सी बारिश जानलेवा बन जाए, तो यह ‘स्मार्ट सिटी’ नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की ‘स्मार्ट नाकामी’ है। हालात इतने खराब रहे कि करंट लगने से कई लोगों की जान तक चली गई। गुरुग्राम को डुबोने की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार है।”


युवा कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें:
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, युवा कांग्रेस ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- बारिश में जान गंवाने वाले परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
- इस बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं की जवाबदेही तय की जाए।
- शहर की जल निकासी और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को जल्द से जल्द सुधारा जाए।
यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है, और कई नागरिकों ने युवा कांग्रेस के इस कदम का समर्थन करते हुए अपनी आवाज़ बुलंद की है। गुरुग्राम की ये समस्याएं अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं — यह एक ऐसी सरकार पर सवाल खड़ा करती हैं, जो बार-बार ‘स्मार्ट सिटी’ के दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह से नाकाम साबित होती दिख रही है।











